ОтцуОтец!Вот несколько уж днейВоспоминанье всё рисуетТвои черты душе моей,И по тебе она тоскует.Всё…
انتشار: 2026/07/27 10:46 UTCویرایش: 2026/07/31 23:59 UTCدریافت: 2026/08/06 22:37 UTCآخرین مشاهده: 2026/08/06 22:37 UTC
ОтцуОтец!Вот несколько уж днейВоспоминанье всё рисуетТвои черты душе моей,И по тебе она тоскует.Всё помню: как ты здесь сидел,С каким, бывало, наслажденьемНа дом, на сад, на пруд глядел,Какую к ним любовь имел,Про них твердил нам с умиленьем:«Всё это, — ты тогда мечтал, —Оставлю сыну в достоянье…»Но равнодушно я внимал,И не туда несло желанье.Я виноват перед тобой:Я с стариком скучал, бывало,Подчас роптал на жребий свой…Прости меня! На ропот мойНабрось забвенья покрывало.Скажи, отец, где ты теперь?Не правда ль, ты воскрес душою?Не правда ль, гробовая дверьНе всё замкнула за собою?Скажи, ты чувствуешь, что яЗдесь на земле грущу, тоскую,Всё помню, всё люблю тебя,Что падала слеза мояНе раз на урну гробовую?О! если всё то знаешь ты —То будь и там мой добрый гений,Храни меня средь суеты,Храни для чистых вдохновений —Молись!..Но, может, в той странеТы сам, раскаяньем гонимый,Страдаешь. О, скажи же мне —Я б стал молиться в тишине,Чтоб бог дал мир душе томимой.Но нет! Ты всё же лучше стал,Чем я среди греха и тленья,Ведь ты в раскаянье страдалИ смыл все пятна заблужденья; —Так ты молись за жребий мой,А я святыни не нарушуМоею грешною мольбой…Молись, отец, и успокойМою тоскующую душу.#Николай_Платонович_Огарёвعنوان شعر: به پدر (برای پدر)پدر!چند روزیست خاطره،چهرهات را بر جانم نقش میکشد،و روحم برایت دلتنگ است.همه را به یاد دارم: چگونه اینجا مینشستی،با چه لذتی نگاه میکردیبه خانه، به باغ، به برکه،و چه عشقی به آنها داشتی،و با مهربانی برایمان میگفتی:«همهٔ اینها را — آن روزها آرزو میکردی —برای پسرم به میراث میگذارم…»اما من بیتفاوت گوش میدادم،و آرزویم به سوی دیگری میرفت.من در پیشگاهت گناهکارم:گاهی از پیرمرد خسته میشدم،و گاه بر سرنوشت خویش مینالیدم…مرا ببخش! بر نالهام پوشش فراموشی بیفکن.بگو، پدر، اکنون کجایی؟مگر نه اینکه جانت دوباره زنده شده؟مگر نه اینکه درِ گورهمه چیز را پشت سر نبسته است؟بگو، آیا حس میکنی که مناینجا روی زمین غمگینم و دلتنگ،همه را به یاد دارم، در همهچیز دوستت دارم،و اشکم بارهابر سنگ مزارت ریخته است؟آه! اگر همهٔ اینها را میدانی —پس آنجا هم فرشتهٔ مهربان من باش،مرا در میان هیاهوی دنیا حفظ کن،مرا برای الهامهای پاک حفظ کن —دعا کن!..اما شاید در آن سرزمینتو خود، رانده از پشیمانی،رنج میکشی. آه، بگو به من —من در سکوت دعا میکردمتا خدا آرامش به جان رنجورت ببخشد.اما نه! تو باز هم بهتر شدهایاز من که در میان گناه و تباهیام.تو در پشیمانی رنج کشیدیو همهٔ لکههای گمراهی را شستی؛ —پس تو برای سرنوشت من دعا کن،و من با دعای گناهآلودمحرمت را نمیشکنم…دعا کن، پدر، و آرام کنجانِ دلتنگِ مرا.نیکالای پلاتُناویچ آگاریُفبرگردان: #محمد_مهدی_روبین#آگاریف #آگاریوف #شعر_روس@RussianLan


